तक्रधारा जयपुर: औषधीय छाछ धारा चिकित्सा | Ayujivan Ayurveda

क्या आपकी त्वचा में जलन, खुजली या बार-बार एलर्जी होती रहती है? क्या स्कैल्प में जलन, बालों का झड़ना या नींद न आने की शिकायत आपको परेशान करती है? आयुर्वेद में ऐसी समस्याओं के लिए एक विशेष, समय-परीक्षित चिकित्सा है — तक्रधारा (Takradhara)। यह एक शीतल, सुखदायक धारा चिकित्सा है जिसमें औषधीय छाछ (तक्र) को एक निश्चित लय में सिर या पूरे शरीर पर लगातार डाला जाता है।

Ayujivan Ayurveda & Panchkarma Clinic, Jaipur में हम शास्त्रोक्त विधि से तक्रधारा चिकित्सा करते हैं, जिसमें ताज़ा तैयार औषधीय छाछ, उचित तापमान और सही समयावधि का पूरा ध्यान रखा जाता है। यह चिकित्सा विशेष रूप से पित्त दोष और त्वचा से जुड़ी समस्याओं में अत्यंत लाभकारी मानी जाती है।

यह लेख आपको तक्रधारा के बारे में विस्तार से जानकारी देगा — यह क्या है, कैसे काम करती है, किन्हें लाभ मिल सकता है, प्रक्रिया कैसी होती है, और किन बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है।

अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी हेतु है और यह किसी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी आयुर्वेदिक चिकित्सा को शुरू करने से पहले कृपया एक योग्य आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य करें। परिणाम प्रत्येक व्यक्ति की प्रकृति, रोग की अवस्था और शरीर की प्रतिक्रिया के अनुसार भिन्न-भिन्न हो सकते हैं।

संक्षिप्त सारांश (Quick Summary)

बिंदुविवरण
चिकित्सा का नामतक्रधारा (Takradhara)
मुख्य सामग्रीऔषधीय छाछ (तक्र) + जड़ी-बूटियाँ
मुख्य दोष संतुलनपित्त दोष (साथ में वात व कफ पर भी सहायक प्रभाव)
मुख्य लाभ क्षेत्रत्वचा रोग, स्कैल्प समस्याएँ, तनाव, अनिद्रा
सामान्य सत्र अवधिलगभग 30-45 मिनट प्रति सत्र
सामान्य कोर्स अवधि7-14 दिन (चिकित्सक के परामर्श अनुसार)
समान चिकित्साएँशिरोधारा (तेल), क्षीरधारा (दूध) — तक्रधारा में औषधीय छाछ प्रयोग होती है
कहाँ उपलब्धAyujivan Ayurveda & Panchkarma Clinic, Jaipur

विषय सूची (Table of Contents)

तक्रधारा क्या है और यह कैसे काम करती है

तक्रधारा शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है — “तक्र” यानी छाछ (मट्ठा) और “धारा” यानी निरंतर बहती हुई धार। इस चिकित्सा में विशेष रूप से तैयार की गई औषधीय छाछ को एक पात्र (धारा पात्र) से लगातार, एक निश्चित गति और ऊँचाई से, रोगी के सिर, माथे या पूरे शरीर पर डाला जाता है।

यह छाछ साधारण घरेलू छाछ नहीं होती। इसे विशेष आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों जैसे आँवला, त्रिफला, नीम, दूर्वा, या रोग की प्रकृति के अनुसार अन्य पित्तशामक औषधियों के साथ किण्वित (fermented) दही से तैयार किया जाता है। इस प्रक्रिया में छाछ को हल्का खट्टा, ठंडा और औषधीय गुणों से युक्त बनाया जाता है।

आयुर्वेद के अनुसार तक्र में तीनों दोषों — वात, पित्त और कफ — को संतुलित करने की क्षमता होती है, परंतु यह विशेष रूप से पित्त दोष को शांत करने में अत्यंत प्रभावी मानी जाती है। इसकी शीतल तासीर त्वचा की जलन, खुजली, लालिमा और सूजन को शांत करने में मदद करती है।

जब यह धारा माथे या सिर पर डाली जाती है, तो इसका शीतल और सुखदायक प्रभाव तंत्रिका तंत्र (nervous system) पर भी पड़ता है, जिससे मानसिक तनाव कम होता है और गहरी शांति का अनुभव होता है। पूरे शरीर पर की जाने वाली तक्रधारा को कभी-कभी “सर्वांग तक्रधारा” भी कहा जाता है, जबकि केवल सिर पर की जाने वाली प्रक्रिया को “शिरो तक्रधारा” कहते हैं।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि तक्रधारा, शिरोधारा और क्षीरधारा — ये तीनों धारा चिकित्साएँ एक ही परिवार की चिकित्साएँ हैं, परंतु इनमें प्रयुक्त द्रव्य (तरल पदार्थ) अलग-अलग होते हैं और इसीलिए इनके प्रभाव भी भिन्न होते हैं।

तक्रधारा, शिरोधारा और क्षीरधारा में अंतर

बहुत से लोग तक्रधारा को शिरोधारा या क्षीरधारा समझ लेते हैं, जबकि इन तीनों में स्पष्ट अंतर है:

  • शिरोधारा: इसमें औषधीय तेल का उपयोग होता है। यह मुख्य रूप से वात दोष को शांत करती है और अनिद्रा, तनाव, माइग्रेन जैसी समस्याओं में उपयोगी है। अधिक जानकारी के लिए हमारा शिरोधारा चिकित्सा पर विस्तृत लेख पढ़ें।
  • क्षीरधारा: इसमें औषधीय दूध का उपयोग होता है। यह भी पित्त शामक है परंतु दूध की पौष्टिकता के कारण यह अधिक पोषणदायक (Brimhana) मानी जाती है। विस्तार से जानने के लिए क्षीरधारा पर हमारा लेख देखें।
  • तक्रधारा: इसमें किण्वित औषधीय छाछ का उपयोग होता है, जो अपनी हल्की खटास और शीतलता के कारण त्वचा रोगों, स्कैल्प की समस्याओं (जैसे सोरायसिस, एक्ज़िमा से जुड़ी खुजली, seborrheic dermatitis की प्रवृत्ति) में विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है।

तीनों चिकित्साओं का मूल सिद्धांत एक जैसा है — निरंतर धारा से तंत्रिका तंत्र को शांत करना — परंतु द्रव्य के चयन से यह तय होता है कि किस रोगी के लिए कौन-सी चिकित्सा अधिक उपयुक्त रहेगी। यह निर्णय चिकित्सक आपकी प्रकृति और रोग की अवस्था देखकर ही लेते हैं।

तक्रधारा के लाभ

पारंपरिक आयुर्वेदिक ग्रंथों और नैदानिक अनुभव के अनुसार तक्रधारा से निम्न लाभ मिल सकते हैं। ध्यान रहे, ये लाभ व्यक्ति-विशेष पर निर्भर करते हैं और सभी को समान रूप से अनुभव नहीं हो सकते:

  • त्वचा को ठंडक और आराम: जलन, लालिमा और खुजली से राहत में सहायक।
  • स्कैल्प स्वास्थ्य में सहयोग: रूखी, खुजलीदार स्कैल्प और बालों से जुड़ी कुछ समस्याओं में सहायक माना जाता है।
  • पित्त दोष का संतुलन: शरीर में अतिरिक्त गर्मी और पित्त वृद्धि को शांत करने में सहायक।
  • मानसिक शांति: तनाव, चिड़चिड़ापन और मानसिक थकान को कम करने में सहायक।
  • नींद की गुणवत्ता में सुधार: नियमित सत्रों से बेहतर और गहरी नींद में सहायता मिल सकती है।
  • रक्त संचार में सुधार: धारा के कारण सिर व त्वचा क्षेत्र में रक्त संचार बेहतर होता है।
  • आँखों की जलन में आराम: कुछ रोगियों को आँखों की गर्मी व जलन में भी राहत मिलती है।
  • सामान्य कायाकल्प (Rejuvenation): समग्र रूप से तरोताज़ा और हल्केपन का अनुभव।

क्लिनिकल अनुभव बताता है कि तक्रधारा विशेष रूप से उन रोगियों में सहायक सिद्ध होती है जिनकी प्रकृति पित्त-प्रधान होती है या जिन्हें गर्मी के मौसम में त्वचा व स्कैल्प संबंधी शिकायतें अधिक होती हैं।

यह किसके लिए उपयुक्त है

तक्रधारा चिकित्सा सामान्यतः निम्न स्थितियों में सुझाई जाती है (चिकित्सक की जांच के बाद):

  • पित्त-प्रधान त्वचा विकार — जैसे खुजली, जलन, लालिमा की प्रवृत्ति
  • स्कैल्प में खुजली, रूखापन या जलन की शिकायत
  • दीर्घकालिक तनाव और मानसिक अशांति
  • अनिद्रा या नींद की गुणवत्ता में कमी
  • पित्त-वृद्धि से जुड़े सिरदर्द की प्रवृत्ति
  • गर्मी के मौसम में बढ़ने वाली शारीरिक-मानसिक बेचैनी
  • सामान्य कायाकल्प व स्वास्थ्य संवर्धन हेतु

यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि हर व्यक्ति के लिए तक्रधारा उपयुक्त नहीं होती। चिकित्सक आपकी प्रकृति, वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति और त्वचा की स्थिति की जाँच के बाद ही यह तय करते हैं कि यह चिकित्सा आपके लिए सही है या नहीं, और यदि हाँ, तो किस प्रकार की औषधीय छाछ और कितने सत्र आवश्यक होंगे।

प्रक्रिया — क्या अपेक्षा करें

Ayujivan Ayurveda & Panchkarma Clinic में तक्रधारा की प्रक्रिया निम्न चरणों में की जाती है:

1. प्रारंभिक परामर्श और जाँच

चिकित्सक पहले आपकी प्रकृति, वर्तमान शिकायत, त्वचा की स्थिति और पूर्व चिकित्सा इतिहास की जाँच करते हैं। इसके आधार पर छाछ में मिलाई जाने वाली जड़ी-बूटियाँ तय की जाती हैं।

2. औषधीय छाछ की तैयारी

ताज़ा दही से छाछ तैयार की जाती है और इसमें रोग के अनुसार चयनित जड़ी-बूटियाँ मिलाई जाती हैं। यह छाछ न अधिक गाढ़ी और न अधिक पतली होनी चाहिए — इसकी स्थिरता (consistency) का सही होना चिकित्सा की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।

3. स्नेहन (हल्का तेल मालिश)

अधिकतर मामलों में तक्रधारा से पहले सिर और शरीर पर हल्का स्नेहन (तेल मालिश) किया जाता है, ताकि त्वचा और तंत्रिका तंत्र तैयार हो सकें।

4. धारा प्रक्रिया

रोगी को आरामदायक स्थिति में लिटाया जाता है। धारा पात्र में छाछ भरकर, एक निश्चित ऊँचाई से, लगातार और एक समान गति में इसे माथे, सिर या पूरे शरीर पर डाला जाता है। यह धार न बहुत तेज़ होती है और न बहुत धीमी — इसकी लय (rhythm) चिकित्सा का मुख्य आधार है। सत्र सामान्यतः 30 से 45 मिनट तक चलता है।

5. विश्राम काल

प्रक्रिया के बाद रोगी को कुछ समय शांत वातावरण में विश्राम करने दिया जाता है, जिससे शरीर धीरे-धीरे सामान्य तापमान व संतुलन में आ सके।

6. स्नान और उपरांत देखभाल

कुछ समय बाद हल्के गुनगुने पानी से स्नान की सलाह दी जाती है। चिकित्सक आपको आहार और दिनचर्या संबंधी सलाह भी देते हैं ताकि चिकित्सा का पूरा लाभ मिल सके।

सामान्यतः तक्रधारा का पूरा लाभ पाने के लिए इसे लगातार 7 से 14 दिनों तक करने की सलाह दी जाती है, हालांकि यह अवधि चिकित्सक आपकी स्थिति के अनुसार घटा-बढ़ा सकते हैं।

सावधानियाँ एवं मतभेद

तक्रधारा एक क्लिनिकल प्रक्रिया है, यह घरेलू उपचार नहीं है। इसे केवल प्रशिक्षित चिकित्सक की देखरेख में ही करवाना चाहिए। निम्न स्थितियों में विशेष सावधानी आवश्यक है या यह चिकित्सा उपयुक्त नहीं हो सकती:

  • अत्यधिक कमज़ोरी या दुर्बलता की स्थिति में
  • गंभीर सर्दी-जुकाम, बुखार या तीव्र संक्रमण के दौरान
  • त्वचा पर खुले घाव, गंभीर संक्रमण या फोड़े-फुंसी की स्थिति में (चिकित्सक की सलाह के बिना नहीं)
  • गर्भावस्था के दौरान — केवल चिकित्सक की स्पष्ट अनुमति से
  • अत्यधिक ठंड के प्रति संवेदनशीलता (छाछ की तासीर ठंडी होने के कारण)
  • कुछ प्रकार के वात-प्रधान विकारों में — चिकित्सक तय करेंगे कि यह उपयुक्त है या नहीं

याद रखें — हर व्यक्ति की प्रकृति अलग होती है, इसलिए एक व्यक्ति के लिए जो लाभकारी है वह दूसरे के लिए उतना उपयुक्त नहीं हो सकता। इसीलिए बिना जाँच के स्वयं यह चिकित्सा शुरू न करें और न ही घर पर इसे करने का प्रयास करें।

पंचकर्म में तक्रधारा की भूमिका

तक्रधारा को आयुर्वेद में मुख्यतः एक पूर्व कर्म (पूर्वकर्म) या सहायक चिकित्सा के रूप में देखा जाता है, जो पूर्ण पंचकर्म चिकित्सा के प्रोटोकॉल का हिस्सा बन सकती है। यह अक्सर निम्न चिकित्साओं के साथ संयोजन में दी जाती है:

  • त्वचा रोगों के उपचार में विरेचन (Virechana) से पहले या साथ में शरीर को तैयार करने हेतु
  • स्कैल्प व त्वचा संबंधी दीर्घकालिक स्थितियों में नियमित संवर्धक चिकित्सा के रूप में
  • मानसिक तनाव प्रबंधन कार्यक्रम के भाग के रूप में शिरोधारा के विकल्प या संयोजन में

हमारे क्लिनिक में चिकित्सक आपकी संपूर्ण जाँच के बाद तय करते हैं कि तक्रधारा को स्वतंत्र चिकित्सा के रूप में देना है या किसी व्यापक पंचकर्म प्रोटोकॉल के भाग के रूप में। यह निर्णय व्यक्तिगत प्रकृति परीक्षण (प्रकृति विश्लेषण) पर आधारित होता है।

तक्रधारा के दौरान आहार-विहार संबंधी सुझाव

किसी भी पंचकर्म चिकित्सा की तरह, तक्रधारा का पूरा लाभ पाने के लिए उचित आहार और दिनचर्या का पालन बहुत महत्वपूर्ण होता है। हमारे चिकित्सक सामान्यतः निम्न सुझाव देते हैं, परंतु आपकी व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार यह बदल सकते हैं:

  • चिकित्सा के दौरान हल्का, सुपाच्य और सादा भोजन लें — अधिक तला-भुना, मसालेदार या गरिष्ठ भोजन से बचें
  • ठंडे पेय पदार्थों की जगह गुनगुना पानी पीना बेहतर माना जाता है
  • सत्र के तुरंत बाद ठंडी हवा, कूलर या AC के सीधे संपर्क में जाने से बचें
  • सत्र के बाद कम से कम 1-2 घंटे आराम करने की सलाह दी जाती है
  • धूप में बहुत देर तक सीधे बाहर निकलने से बचें, विशेषकर स्नान के तुरंत बाद
  • तनाव कम करने वाली गतिविधियाँ जैसे हल्का प्राणायाम या ध्यान चिकित्सा के प्रभाव को बढ़ा सकती हैं
  • शराब, धूम्रपान और अत्यधिक कैफीन से चिकित्सा अवधि के दौरान परहेज़ करना बेहतर रहता है

ये सामान्य दिशा-निर्देश हैं। आपकी प्रकृति, रोग की अवस्था और मौसम के अनुसार चिकित्सक आपको विशिष्ट आहार-विहार योजना देंगे, जिसका पालन करने से चिकित्सा के परिणाम बेहतर हो सकते हैं।

मिथक बनाम तथ्य

मिथकतथ्य
तक्रधारा और शिरोधारा एक ही चीज़ हैंदोनों अलग हैं — शिरोधारा में तेल, तक्रधारा में औषधीय छाछ प्रयोग होती है, और इनके प्रभाव भी भिन्न हैं
इसे घर पर सादी छाछ से किया जा सकता हैतक्रधारा में विशेष औषधीय, किण्वित छाछ और सही तकनीक चाहिए — यह घरेलू उपाय नहीं, क्लिनिकल प्रक्रिया है
एक ही सत्र से स्थायी लाभ मिल जाता हैलाभ के लिए सामान्यतः कई सत्रों (7-14 दिन) की आवश्यकता होती है, और परिणाम व्यक्ति अनुसार भिन्न होते हैं
यह केवल त्वचा रोगियों के लिए हैयह मानसिक तनाव, अनिद्रा और सामान्य कायाकल्प के लिए भी उपयोगी मानी जाती है
यह 100% रोग को जड़ से खत्म कर देती हैकोई भी चिकित्सा 100% या स्थायी इलाज की गारंटी नहीं दे सकती — यह सहायक चिकित्सा है, परिणाम भिन्न होते हैं
सभी को यह चिकित्सा सूट करती हैप्रकृति और रोग अवस्था के अनुसार यह हर किसी के लिए उपयुक्त नहीं हो सकती

डॉक्टर से कब मिलें

निम्न स्थितियों में तुरंत किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श करें:

  • त्वचा में लगातार खुजली, जलन या लालिमा बनी रहे
  • स्कैल्प की समस्या के साथ बालों का असामान्य झड़ना हो रहा हो
  • तनाव या अनिद्रा दैनिक जीवन को प्रभावित करने लगे
  • त्वचा पर कोई नया घाव, संक्रमण या असामान्य परिवर्तन दिखे
  • पहले से कोई पुरानी बीमारी हो और आप कोई नई चिकित्सा शुरू करना चाहते हों
  • यदि आप गर्भवती हैं या स्तनपान करा रही हैं और यह चिकित्सा लेना चाहती हैं

Ayujivan Ayurveda & Panchkarma Clinic, Jaipur में हमारे अनुभवी चिकित्सक आपकी पूरी जाँच के बाद ही उचित चिकित्सा योजना सुझाते हैं। बिना जाँच के कोई भी चिकित्सा स्वयं शुरू न करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: तक्रधारा और शिरोधारा में क्या अंतर है?
उत्तर: शिरोधारा में औषधीय तेल का प्रयोग होता है जबकि तक्रधारा में औषधीय, किण्वित छाछ का प्रयोग होता है। शिरोधारा मुख्यतः वात शामक है जबकि तक्रधारा मुख्यतः पित्त शामक और त्वचा-स्कैल्प संबंधी समस्याओं में अधिक उपयोगी मानी जाती है।

प्रश्न: एक सत्र में कितना समय लगता है?
उत्तर: सामान्यतः एक सत्र में लगभग 30 से 45 मिनट लगते हैं, परंतु यह रोगी की स्थिति और चिकित्सक की सलाह पर निर्भर करता है।

प्रश्न: कितने सत्रों की आवश्यकता होती है?
उत्तर: सामान्यतः 7 से 14 दिनों तक लगातार सत्र सुझाए जाते हैं, परंतु यह पूरी तरह से रोग की अवस्था और चिकित्सक के मूल्यांकन पर निर्भर करता है।

प्रश्न: क्या तक्रधारा से बाल झड़ना बंद हो जाता है?
उत्तर: तक्रधारा स्कैल्प की सेहत सुधारने में सहायक मानी जाती है, परंतु बालों के झड़ने के कई कारण हो सकते हैं। पूर्ण मूल्यांकन के बाद ही चिकित्सक उचित उपचार योजना बना सकते हैं। यह कोई गारंटीशुदा समाधान नहीं है।

प्रश्न: क्या यह चिकित्सा दर्दरहित होती है?
उत्तर: हाँ, तक्रधारा एक सुखदायक, आरामदायक और गैर-आक्रामक (non-invasive) प्रक्रिया है। अधिकांश रोगी इसे बहुत आरामदायक अनुभव बताते हैं।

प्रश्न: क्या गर्भवती महिलाएँ यह चिकित्सा करा सकती हैं?
उत्तर: गर्भावस्था के दौरान कोई भी पंचकर्म चिकित्सा केवल चिकित्सक की स्पष्ट अनुमति और निगरानी में ही करानी चाहिए। बिना परामर्श के इसे न करें।

प्रश्न: क्या तक्रधारा के कोई दुष्प्रभाव हैं?
उत्तर: सही तरीके से और योग्य चिकित्सक की देखरेख में की जाने पर यह सामान्यतः सुरक्षित मानी जाती है, परंतु किसी भी चिकित्सा की तरह व्यक्ति विशेष पर प्रतिक्रिया भिन्न हो सकती है। इसलिए हमेशा प्रशिक्षित केंद्र में ही यह चिकित्सा करवाएँ।

प्रश्न: क्या इसे घर पर स्वयं किया जा सकता है?
उत्तर: नहीं। तक्रधारा के लिए विशेष उपकरण, सही तापमान, सही स्थिरता की औषधीय छाछ और प्रशिक्षित तकनीक चाहिए। यह क्लिनिक में प्रशिक्षित चिकित्सक की देखरेख में ही करवाई जानी चाहिए।

प्रश्न: तक्रधारा किस मौसम में सबसे अधिक उपयुक्त मानी जाती है?
उत्तर: अपनी शीतल तासीर के कारण यह गर्मी के मौसम में विशेष रूप से आरामदायक मानी जाती है, परंतु चिकित्सक रोग की अवस्था के अनुसार वर्षभर इसकी सलाह दे सकते हैं।

निष्कर्ष एवं CTA

तक्रधारा आयुर्वेद की एक सुंदर, शीतल और सुखदायक धारा चिकित्सा है जो पित्त दोष को संतुलित करने, त्वचा व स्कैल्प की समस्याओं में सहायता करने और मानसिक शांति प्रदान करने में मदद कर सकती है। हालांकि, हर चिकित्सा की तरह इसके भी अपने संकेत और सावधानियाँ हैं, इसलिए इसे केवल योग्य आयुर्वेदाचार्य की देखरेख में ही करवाना चाहिए।

यदि आप जयपुर में तक्रधारा चिकित्सा करवाना चाहते हैं, तो Ayujivan Ayurveda & Panchkarma Clinic में हमारे अनुभवी चिकित्सकों से मिलें। हम आपकी प्रकृति और स्वास्थ्य स्थिति की पूरी जाँच के बाद ही उचित चिकित्सा योजना सुझाते हैं।

अधिक जानकारी के लिए हमारे बारे में यहाँ पढ़ें या किसी भी प्रश्न के लिए हमसे संपर्क करें। पंचकर्म चिकित्सा के समग्र लाभों के बारे में जानने के लिए हमारा पंचकर्म के फायदे लेख भी अवश्य पढ़ें।

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समापन अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्य के लिए है और यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। किसी भी आयुर्वेदिक चिकित्सा को अपनाने से पहले हमेशा एक योग्य, पंजीकृत आयुर्वेदिक चिकित्सक से व्यक्तिगत परामर्श लें। परिणाम हर व्यक्ति में भिन्न हो सकते हैं और किसी भी चिकित्सा से 100% या स्थायी इलाज की गारंटी नहीं दी जा सकती।

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