पिझिचिल जयपुर: गर्म तेल स्नान चिकित्सा | Ayujivan Ayurveda

क्या आपको जोड़ों में दर्द, अकड़न या शरीर में लगातार थकावट महसूस होती है? क्या लकवा (paralysis) या तंत्रिका संबंधी कमज़ोरी के बाद आप एक प्रभावी, पारंपरिक पुनर्वास चिकित्सा की तलाश में हैं? आयुर्वेद की सबसे राजसी और शक्तिशाली चिकित्साओं में से एक — पिझिचिल (Pizhichil) — इन समस्याओं में सहायक मानी जाती है।

पिझिचिल केरल की परंपरा से जुड़ी एक विशेष स्नेहन-स्वेदन चिकित्सा है, जिसमें गुनगुने औषधीय तेल को लगातार, एक विशेष लय में, पूरे शरीर पर डाला जाता है और साथ ही कोमल मालिश भी की जाती है। इसे अक्सर “राजाओं की चिकित्सा” भी कहा जाता है क्योंकि प्राचीन समय में इसे विशेष रूप से राजघरानों में स्वास्थ्य-संवर्धन और कायाकल्प के लिए किया जाता था।

Ayujivan Ayurveda & Panchkarma Clinic, Jaipur में हम शास्त्रोक्त विधि से पिझिचिल चिकित्सा करते हैं, जिसमें प्रशिक्षित चिकित्सकों की टीम द्वारा उचित तापमान, सही औषधीय तेल और सटीक तकनीक का पूरा ध्यान रखा जाता है।

अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी हेतु है और यह किसी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी आयुर्वेदिक चिकित्सा को शुरू करने से पहले कृपया एक योग्य आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य करें। परिणाम प्रत्येक व्यक्ति की प्रकृति, रोग की अवस्था और शरीर की प्रतिक्रिया के अनुसार भिन्न-भिन्न हो सकते हैं।

संक्षिप्त सारांश (Quick Summary)

बिंदुविवरण
चिकित्सा का नामपिझिचिल (Pizhichil)
मुख्य सामग्रीगुनगुना औषधीय तेल (शरीर की प्रकृति अनुसार चयनित)
मुख्य दोष संतुलनवात दोष
मुख्य लाभ क्षेत्रजोड़ों का दर्द, गठिया, लकवा, सामान्य दुर्बलता, कायाकल्प
सामान्य सत्र अवधिलगभग 60-90 मिनट प्रति सत्र
सामान्य कोर्स अवधि7-14 दिन (चिकित्सक के परामर्श अनुसार)
चिकित्सकों की संख्यासामान्यतः 2 से 4 प्रशिक्षित चिकित्सक एक साथ
कहाँ उपलब्धAyujivan Ayurveda & Panchkarma Clinic, Jaipur

विषय सूची (Table of Contents)

पिझिचिल क्या है और यह कैसे काम करता है

“पिझिचिल” शब्द मलयालम भाषा से आया है, जिसका अर्थ है “निचोड़ना” या “छिड़कना”। यह पारंपरिक रूप से गुनगुने औषधीय तेल को कपड़े की सहायता से निचोड़कर, लगातार धार के रूप में, पूरे शरीर पर डालने की प्रक्रिया है। इसके साथ ही 2 से 4 प्रशिक्षित चिकित्सक एक विशेष लयबद्ध तकनीक से रोगी के पूरे शरीर की कोमल मालिश करते हैं।

यह चिकित्सा मुख्यतः वात दोष को शांत करने के लिए बनाई गई है। आयुर्वेद के अनुसार वात दोष के असंतुलन से जोड़ों का दर्द, अकड़न, मांसपेशियों की कमज़ोरी, तंत्रिका तंत्र संबंधी समस्याएँ और सामान्य दुर्बलता उत्पन्न होती है। गुनगुने तेल की निरंतर धारा और साथ की गई लयबद्ध मालिश शरीर की गहरी परतों तक पहुँचकर मांसपेशियों, जोड़ों और तंत्रिकाओं को पोषण देने में सहायक मानी जाती है।

पिझिचिल में प्रयोग होने वाला तेल रोगी की प्रकृति और रोग की अवस्था के अनुसार चुना जाता है — सामान्यतः बलवर्धक (Balya) और वातशामक गुणों वाले औषधीय तेल का उपयोग किया जाता है। तेल को हल्का गुनगुना रखा जाता है ताकि यह त्वचा की गहराई तक आसानी से अवशोषित हो सके।

पिझिचिल, स्वेदन और अभ्यंग में अंतर

पिझिचिल को समझने के लिए इसकी तुलना दो अन्य लोकप्रिय चिकित्साओं से करना उपयोगी है:

  • स्वेदन (स्टीम थेरेपी): इसमें औषधीय भाप के माध्यम से शरीर को पसीना दिलाया जाता है, जिससे शरीर में जमे हुए दोष और आम (टॉक्सिन्स) ढीले होकर बाहर निकलने में मदद मिलती है। पिझिचिल में तेल की धारा और मालिश का संयोजन होता है, जबकि स्वेदन में मुख्यतः भाप का प्रयोग होता है। पूरी जानकारी के लिए हमारा स्वेदन चिकित्सा पर लेख पढ़ें।
  • अभ्यंग (तेल मालिश): यह एक सामान्य पूर्ण-शरीर तेल मालिश है जो एक चिकित्सक द्वारा की जाती है। पिझिचिल इससे कहीं अधिक गहन है — इसमें निरंतर तेल की धारा, कई चिकित्सक एक साथ, और लंबी अवधि की चिकित्सा शामिल होती है। अभ्यंग के बारे में विस्तार से जानने के लिए यह लेख पढ़ें।

सरल शब्दों में कहें तो पिझिचिल, अभ्यंग और स्वेदन दोनों के तत्वों को मिलाकर बनी एक अधिक गहन, शक्तिशाली और दीर्घकालिक चिकित्सा है, जो विशेष रूप से वात-प्रधान, दीर्घकालिक और गंभीर स्थितियों के लिए उपयोग की जाती है।

पिझिचिल के लाभ

पारंपरिक ग्रंथों और नैदानिक अनुभव के अनुसार पिझिचिल चिकित्सा से निम्न लाभ मिल सकते हैं। ध्यान रहे, ये लाभ व्यक्ति-विशेष पर निर्भर करते हैं:

  • जोड़ों के दर्द में राहत: गठिया (आर्थराइटिस) जैसी स्थितियों में दर्द व अकड़न कम करने में सहायक।
  • मांसपेशियों को पोषण: कमज़ोर और शिथिल मांसपेशियों को मज़बूती देने में सहायक।
  • तंत्रिका तंत्र में सुधार: लकवे के बाद की पुनर्वास प्रक्रिया में सहायक मानी जाती है।
  • रक्त संचार में सुधार: निरंतर तेल धारा व मालिश से परिधीय रक्त संचार बेहतर होता है।
  • लचीलापन बढ़ाना: जोड़ों की गतिशीलता (mobility) में सुधार लाने में सहायक।
  • सामान्य कायाकल्प: संपूर्ण शारीरिक बल और ऊर्जा बढ़ाने में सहायक — इसे ‘बल्य’ चिकित्सा भी कहा जाता है।
  • त्वचा की सेहत: त्वचा को मुलायम, चमकदार और पोषित बनाने में सहायक।
  • मानसिक शांति: गहन विश्राम और तनाव में कमी का अनुभव।

क्लिनिकल अनुभव बताता है कि पिझिचिल विशेष रूप से वात-प्रधान गठिया, दीर्घकालिक जोड़ों के दर्द और न्यूरोलॉजिकल पुनर्वास में सहायक चिकित्सा के रूप में सहायक सिद्ध होती है।

यह किसके लिए उपयुक्त है

पिझिचिल चिकित्सा सामान्यतः निम्न स्थितियों में सुझाई जाती है (चिकित्सक की जांच के बाद):

  • वात-प्रधान गठिया व जोड़ों का दर्द
  • मांसपेशियों की कमज़ोरी या दुर्बलता
  • लकवे (पैरालिसिस) के बाद पुनर्वास चरण में
  • दीर्घकालिक पीठ दर्द और गर्दन की अकड़न
  • सामान्य शारीरिक कमज़ोरी और थकावट
  • वृद्धावस्था में शरीर की देखभाल व कायाकल्प हेतु
  • तंत्रिका तंत्र से जुड़ी कुछ दीर्घकालिक समस्याएँ

यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि हर व्यक्ति के लिए पिझिचिल उपयुक्त नहीं होती। चिकित्सक आपकी प्रकृति, वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति, हृदय स्वास्थ्य और अन्य कारकों की जाँच के बाद ही यह तय करते हैं कि यह चिकित्सा आपके लिए सही है या नहीं।

प्रक्रिया — क्या अपेक्षा करें

Ayujivan Ayurveda & Panchkarma Clinic में पिझिचिल की प्रक्रिया निम्न चरणों में की जाती है:

1. प्रारंभिक परामर्श और जाँच

चिकित्सक पहले आपकी प्रकृति, वर्तमान शिकायत, हृदय स्वास्थ्य और पूर्व चिकित्सा इतिहास की जाँच करते हैं। इसके आधार पर उपयुक्त औषधीय तेल चुना जाता है।

2. तेल की तैयारी

चयनित औषधीय तेल को एक विशेष बर्तन में हल्का गुनगुना गर्म किया जाता है। तापमान का सही होना बहुत महत्वपूर्ण है — न बहुत गर्म, न बहुत ठंडा।

3. रोगी की स्थिति

रोगी को लकड़ी की विशेष द्रोणी (droni) पर आरामदायक स्थिति में लिटाया जाता है, जिससे बहता हुआ तेल इकट्ठा होकर पुनः उपयोग में लाया जा सके।

4. तेल धारा व मालिश

2 से 4 प्रशिक्षित चिकित्सक कपड़े की सहायता से गुनगुने तेल को निचोड़ते हुए, एक विशेष लयबद्ध गति में, शरीर के विभिन्न भागों पर लगातार डालते हैं, साथ ही कोमल, समकालिक मालिश भी करते हैं। यह प्रक्रिया शरीर के हर अंग पर — हाथ, पैर, पीठ, पेट, छाती — क्रमवार की जाती है। सत्र सामान्यतः 60 से 90 मिनट तक चलता है।

5. विश्राम काल

प्रक्रिया के बाद रोगी को कुछ समय शांत वातावरण में विश्राम करने दिया जाता है ताकि तेल त्वचा में अच्छी तरह अवशोषित हो सके।

6. स्नान और उपरांत देखभाल

कुछ समय बाद हल्के गुनगुने पानी और हर्बल उबटन से स्नान की सलाह दी जाती है। चिकित्सक आहार और दिनचर्या संबंधी सलाह भी देते हैं।

सामान्यतः पिझिचिल का पूरा लाभ पाने के लिए इसे लगातार 7 से 14 दिनों तक करने की सलाह दी जाती है, हालांकि गंभीर स्थितियों में चिकित्सक इसे अधिक विस्तारित भी कर सकते हैं।

सावधानियाँ एवं मतभेद

पिझिचिल एक गहन क्लिनिकल प्रक्रिया है, यह घरेलू उपचार नहीं है और इसे केवल प्रशिक्षित चिकित्सकों की टीम की देखरेख में ही करवाना चाहिए। निम्न स्थितियों में विशेष सावधानी आवश्यक है या यह चिकित्सा उपयुक्त नहीं हो सकती:

  • हृदय रोग या उच्च रक्तचाप की अनियंत्रित स्थिति में — चिकित्सक की स्पष्ट अनुमति आवश्यक
  • गंभीर बुखार या तीव्र संक्रमण के दौरान
  • त्वचा पर खुले घाव या गंभीर संक्रमण की स्थिति में
  • गर्भावस्था के दौरान — केवल चिकित्सक की स्पष्ट अनुमति से
  • अत्यधिक मोटापे या कुछ अन्य चयापचय संबंधी स्थितियों में विशेष सावधानी
  • कफ-प्रधान विकारों या अत्यधिक शरीर में जमाव (congestion) की स्थिति में — चिकित्सक तय करेंगे

याद रखें — पिझिचिल एक शारीरिक रूप से गहन चिकित्सा है, इसलिए बिना उचित जाँच और निगरानी के इसे कभी न करवाएँ। हृदय और रक्तचाप संबंधी जाँच विशेष रूप से आवश्यक है।

पंचकर्म में पिझिचिल की भूमिका

पिझिचिल को आयुर्वेद में एक शक्तिशाली स्नेहन-स्वेदन संयुक्त चिकित्सा के रूप में देखा जाता है, जो पूर्ण पंचकर्म चिकित्सा के प्रोटोकॉल का एक महत्वपूर्ण भाग बन सकती है। यह अक्सर निम्न तरीकों से उपयोग की जाती है:

  • वस्ति (बस्ति) चिकित्सा से पहले शरीर को तैयार करने हेतु स्नेहन प्रक्रिया के रूप में
  • न्यूरोलॉजिकल पुनर्वास कार्यक्रम के मुख्य घटक के रूप में
  • गठिया व जोड़ों के दर्द के दीर्घकालिक प्रबंधन कार्यक्रम में स्वेदन और अन्य चिकित्साओं के साथ संयोजन में

हमारे क्लिनिक में चिकित्सक आपकी संपूर्ण जाँच के बाद तय करते हैं कि पिझिचिल को स्वतंत्र चिकित्सा के रूप में देना है या किसी व्यापक पंचकर्म प्रोटोकॉल के भाग के रूप में। यह निर्णय व्यक्तिगत प्रकृति परीक्षण पर आधारित होता है।

पिझिचिल के दौरान आहार-विहार संबंधी सुझाव

पिझिचिल एक गहन चिकित्सा है, इसलिए इसका पूरा लाभ पाने के लिए उचित आहार और दिनचर्या का पालन बहुत महत्वपूर्ण होता है। हमारे चिकित्सक सामान्यतः निम्न सुझाव देते हैं:

  • चिकित्सा के दौरान हल्का, पौष्टिक और सुपाच्य भोजन लें — ठंडा, बासी या अत्यधिक भारी भोजन से बचें
  • पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी पिएँ
  • चिकित्सा अवधि के दौरान अधिक शारीरिक श्रम या व्यायाम से बचें, शरीर को आराम दें
  • सत्र के बाद कम से कम 1-2 घंटे आराम करने की सलाह दी जाती है
  • ठंडी हवा, कूलर, AC के सीधे संपर्क से बचें, विशेषकर सत्र के तुरंत बाद
  • तनाव-मुक्त, शांत दिनचर्या बनाए रखें — यह चिकित्सा के प्रभाव को बढ़ाने में सहायक होती है
  • शराब, धूम्रपान से चिकित्सा अवधि के दौरान पूर्ण परहेज़ करें

ये सामान्य दिशा-निर्देश हैं। आपकी प्रकृति, रोग की अवस्था और मौसम के अनुसार चिकित्सक आपको विशिष्ट आहार-विहार योजना देंगे।

पिझिचिल के दौरान कैसा अनुभव होता है

पहली बार पिझिचिल करवाने वाले मरीज़ अक्सर पूछते हैं कि यह अनुभव कैसा होता है। सत्र शुरू होते ही गुनगुने तेल की लगातार धारा त्वचा पर एक गहरी शिथिलता (deep relaxation) का अनुभव कराती है। कई मरीज़ बताते हैं कि सत्र के दौरान उन्हें हल्की नींद आने लगती है — यह चिकित्सा के गहरे शांतिदायक प्रभाव का संकेत है।

चूँकि कई चिकित्सक एक साथ, एक समान लय में काम करते हैं, इसलिए शरीर को एक विशेष प्रकार की तरंग जैसी अनुभूति होती है। शुरुआती कुछ मिनटों में तेल का तापमान थोड़ा अधिक महसूस हो सकता है, परंतु चिकित्सक लगातार तापमान की जाँच करते रहते हैं ताकि यह हमेशा आरामदायक बना रहे।

सत्र के बाद अधिकांश रोगी अपने शरीर में एक विशेष हल्केपन, बेहतर लचीलेपन और मानसिक ताज़गी का अनुभव करते हैं। कोर्स के बढ़ने के साथ-साथ यह प्रभाव संचयी (cumulative) रूप से बढ़ता जाता है, इसीलिए पूरा कोर्स करना लाभकारी माना जाता है।

मिथक बनाम तथ्य

मिथकतथ्य
पिझिचिल और अभ्यंग एक ही चीज़ हैंपिझिचिल अभ्यंग से कहीं अधिक गहन है — इसमें निरंतर तेल धारा, कई चिकित्सक और लंबी अवधि शामिल होती है
यह केवल गठिया रोगियों के लिए हैयह लकवा पुनर्वास, सामान्य दुर्बलता और कायाकल्प के लिए भी उपयोगी मानी जाती है
घर पर तेल मालिश से भी यही लाभ मिल जाता हैपिझिचिल के लिए विशेष तकनीक, कई प्रशिक्षित चिकित्सक और सटीक तापमान नियंत्रण चाहिए — यह घरेलू उपाय नहीं है
एक ही सत्र से स्थायी लाभ मिल जाता हैलाभ के लिए सामान्यतः 7-14 दिनों के कोर्स की आवश्यकता होती है, और परिणाम व्यक्ति अनुसार भिन्न होते हैं
यह 100% लकवे को ठीक कर देती हैकोई भी चिकित्सा 100% या स्थायी इलाज की गारंटी नहीं दे सकती — यह सहायक पुनर्वास चिकित्सा है
सभी को यह चिकित्सा सूट करती हैहृदय रोग, उच्च रक्तचाप जैसी स्थितियों में विशेष सावधानी या चिकित्सक की अनुमति आवश्यक होती है

डॉक्टर से कब मिलें

निम्न स्थितियों में तुरंत किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श करें:

  • जोड़ों का दर्द या अकड़न दैनिक जीवन को प्रभावित करने लगे
  • लकवे के बाद पुनर्वास योजना की आवश्यकता हो
  • मांसपेशियों में लगातार कमज़ोरी महसूस हो
  • पहले से हृदय रोग, उच्च रक्तचाप या अन्य पुरानी बीमारी हो और आप यह चिकित्सा लेना चाहते हों
  • त्वचा पर कोई नया घाव, संक्रमण या असामान्य परिवर्तन दिखे
  • यदि आप गर्भवती हैं और यह चिकित्सा लेना चाहती हैं

Ayujivan Ayurveda & Panchkarma Clinic, Jaipur में हमारे अनुभवी चिकित्सक आपकी पूरी जाँच के बाद ही उचित चिकित्सा योजना सुझाते हैं। बिना जाँच के कोई भी चिकित्सा स्वयं शुरू न करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: पिझिचिल और अभ्यंग में क्या अंतर है?
उत्तर: अभ्यंग एक सामान्य पूर्ण-शरीर तेल मालिश है, जबकि पिझिचिल में निरंतर गुनगुने तेल की धारा के साथ कई प्रशिक्षित चिकित्सकों द्वारा लयबद्ध मालिश की जाती है। पिझिचिल अधिक गहन और दीर्घकालिक चिकित्सा है।

प्रश्न: एक सत्र में कितना समय लगता है?
उत्तर: सामान्यतः एक सत्र में लगभग 60 से 90 मिनट लगते हैं, परंतु यह रोगी की स्थिति और चिकित्सक की सलाह पर निर्भर करता है।

प्रश्न: कितने सत्रों की आवश्यकता होती है?
उत्तर: सामान्यतः 7 से 14 दिनों तक लगातार सत्र सुझाए जाते हैं, परंतु यह पूरी तरह से रोग की अवस्था और चिकित्सक के मूल्यांकन पर निर्भर करता है।

प्रश्न: क्या पिझिचिल से लकवा पूरी तरह ठीक हो जाता है?
उत्तर: पिझिचिल लकवे के बाद के पुनर्वास में सहायक चिकित्सा मानी जाती है, परंतु यह किसी भी स्थिति में स्थायी या 100% इलाज की गारंटी नहीं देती। परिणाम रोग की गंभीरता, अवधि और व्यक्ति की प्रतिक्रिया पर निर्भर करते हैं। पूर्ण मूल्यांकन के बाद ही चिकित्सक उचित योजना बना सकते हैं।

प्रश्न: क्या यह चिकित्सा दर्दरहित होती है?
उत्तर: हाँ, पिझिचिल एक सुखदायक और आरामदायक प्रक्रिया है। अधिकांश रोगी इसे बहुत सुकूनदायक अनुभव बताते हैं, हालांकि कुछ को शुरुआत में गर्म तेल के कारण हल्की असहजता महसूस हो सकती है जो जल्द ही सामान्य हो जाती है।

प्रश्न: क्या हृदय रोगी यह चिकित्सा करा सकते हैं?
उत्तर: हृदय रोग या अनियंत्रित उच्च रक्तचाप की स्थिति में यह चिकित्सा केवल चिकित्सक की स्पष्ट अनुमति और सतर्क निगरानी में ही करानी चाहिए। बिना जाँच के इसे न करें।

प्रश्न: क्या इसे घर पर स्वयं किया जा सकता है?
उत्तर: नहीं। पिझिचिल के लिए कई प्रशिक्षित चिकित्सक, विशेष द्रोणी, सही तापमान नियंत्रण और सटीक तकनीक चाहिए। यह क्लिनिक में प्रशिक्षित टीम की देखरेख में ही करवाई जानी चाहिए।

प्रश्न: क्या पिझिचिल के कोई दुष्प्रभाव हैं?
उत्तर: सही तरीके से और योग्य चिकित्सकों की देखरेख में की जाने पर यह सामान्यतः सुरक्षित मानी जाती है, परंतु किसी भी चिकित्सा की तरह व्यक्ति विशेष पर प्रतिक्रिया भिन्न हो सकती है। इसलिए हमेशा प्रशिक्षित केंद्र में ही यह चिकित्सा करवाएँ।

प्रश्न: पिझिचिल किन लोगों के लिए सबसे अधिक उपयुक्त मानी जाती है?
उत्तर: यह विशेष रूप से वात-प्रधान गठिया, मांसपेशियों की कमज़ोरी, लकवे के बाद पुनर्वास और सामान्य कायाकल्प चाहने वाले लोगों के लिए उपयुक्त मानी जाती है, परंतु अंतिम निर्णय चिकित्सक की जाँच के बाद ही लिया जाना चाहिए।

निष्कर्ष एवं CTA

पिझिचिल आयुर्वेद की सबसे गहन, शक्तिशाली और पारंपरिक स्नेहन-स्वेदन चिकित्साओं में से एक है, जो वात दोष को संतुलित करने, जोड़ों के दर्द से राहत देने और शारीरिक पुनर्वास में सहायता करने में मदद कर सकती है। हालांकि, इसकी गहनता के कारण इसे केवल योग्य, प्रशिक्षित चिकित्सकों की टीम की देखरेख में ही करवाना चाहिए।

यदि आप जयपुर में पिझिचिल चिकित्सा करवाना चाहते हैं, तो Ayujivan Ayurveda & Panchkarma Clinic में हमारे अनुभवी चिकित्सकों से मिलें। हम आपकी प्रकृति और स्वास्थ्य स्थिति की पूरी जाँच के बाद ही उचित चिकित्सा योजना सुझाते हैं।

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समापन अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्य के लिए है और यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। किसी भी आयुर्वेदिक चिकित्सा को अपनाने से पहले हमेशा एक योग्य, पंजीकृत आयुर्वेदिक चिकित्सक से व्यक्तिगत परामर्श लें। परिणाम हर व्यक्ति में भिन्न हो सकते हैं और किसी भी चिकित्सा से 100% या स्थायी इलाज की गारंटी नहीं दी जा सकती।

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