नवाराकिझि जयपुर: चावल पिंड स्वेदन चिकित्सा | Ayujivan Ayurveda

क्या आपको मांसपेशियों में कमज़ोरी, वज़न में लगातार कमी या शरीर में पोषण की कमी महसूस होती है? क्या तंत्रिका संबंधी कमज़ोरी के बाद आप एक गहन पोषणदायक पुनर्वास चिकित्सा खोज रहे हैं? आयुर्वेद की एक विशेष, अत्यंत पौष्टिक चिकित्सा — नवाराकिझि (Navarakizhi) — इन समस्याओं में सहायक मानी जाती है।

नवाराकिझि केरल की परंपरा से जुड़ी एक विशेष स्वेदन (बोलस मालिश) चिकित्सा है, जिसमें विशेष औषधीय चावल — नवारा या षष्टिक शालि — को दूध और औषधीय काढ़े में पकाकर, कपड़े की पोटलियों (किझि/पिंड) में बाँधकर, गुनगुने रूप में शरीर पर मालिश की जाती है। यह अपनी गहरी पोषणदायक (बृंहण) क्षमता के लिए विशेष रूप से जानी जाती है।

Ayujivan Ayurveda & Panchkarma Clinic, Jaipur में हम शास्त्रोक्त विधि से नवाराकिझि चिकित्सा करते हैं, जिसमें विशेष औषधीय चावल, सही दूध-काढ़ा अनुपात और प्रशिक्षित तकनीक का पूरा ध्यान रखा जाता है।

अस्वीकरण: यह लेख केवल सामान्य जानकारी हेतु है और यह किसी चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी आयुर्वेदिक चिकित्सा को शुरू करने से पहले कृपया एक योग्य आयुर्वेदाचार्य से परामर्श अवश्य करें। परिणाम प्रत्येक व्यक्ति की प्रकृति, रोग की अवस्था और शरीर की प्रतिक्रिया के अनुसार भिन्न-भिन्न हो सकते हैं।

संक्षिप्त सारांश (Quick Summary)

बिंदुविवरण
चिकित्सा का नामनवाराकिझि (Navarakizhi)
मुख्य सामग्रीनवारा/षष्टिक शालि चावल, दूध, औषधीय काढ़ा
मुख्य गुणअत्यंत पोषणदायक (बृंहण), बलवर्धक
मुख्य लाभ क्षेत्रमांसपेशियों की कमज़ोरी, तंत्रिका दुर्बलता, वज़न में कमी, कायाकल्प
सामान्य सत्र अवधिलगभग 45-60 मिनट प्रति सत्र
सामान्य कोर्स अवधि7-14 दिन (चिकित्सक के परामर्श अनुसार)
समान चिकित्साएँचूर्ण पिंड स्वेदन (हर्बल पाउडर), पोट्टलि स्वेद (सामान्य हर्बल पोटली) — नवाराकिझि में विशेष रूप से औषधीय चावल-दूध प्रयोग होता है
कहाँ उपलब्धAyujivan Ayurveda & Panchkarma Clinic, Jaipur

विषय सूची (Table of Contents)

नवाराकिझि क्या है और यह कैसे काम करता है

“नवाराकिझि” शब्द दो भागों से बना है — “नवारा” (एक विशेष औषधीय चावल की किस्म, जिसे षष्टिक शालि भी कहते हैं) और “किझि” (मलयालम में पोटली या बोलस)। इस चिकित्सा में नवारा चावल को गाय के दूध और दशमूल या बला जैसी वातशामक-बलवर्धक जड़ी-बूटियों के काढ़े में पकाया जाता है, फिर इसे मुलायम कपड़े की पोटलियों में बाँधा जाता है।

इन गुनगुनी पोटलियों को औषधीय तेल से पहले से चुपड़े हुए शरीर पर, एक विशेष लयबद्ध तकनीक से, लगातार दबाकर और रगड़कर मालिश की जाती है। पोटलियों को बीच-बीच में दोबारा गर्म काढ़े में डुबोकर तापमान बनाए रखा जाता है।

नवारा चावल आयुर्वेद में अपने असाधारण पोषण गुणों के लिए प्रसिद्ध है। यह प्रोटीन और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होता है, और दूध व औषधीय काढ़े के साथ मिलकर यह त्वचा की गहराई तक पहुँचकर मांसपेशियों, धातुओं (शारीरिक ऊतकों) को गहराई से पोषण देने में सहायक मानी जाती है। इसी कारण इसे आयुर्वेद की सबसे प्रभावी बृंहण (पोषणदायक) चिकित्साओं में गिना जाता है।

नवाराकिझि, चूर्ण पिंड स्वेदन और पोट्टलि स्वेद में अंतर

बहुत से लोग नवाराकिझि को अन्य पोटली-आधारित स्वेदन चिकित्साओं से भ्रमित कर देते हैं। यहाँ मुख्य अंतर स्पष्ट किया गया है:

  • चूर्ण पिंड स्वेदन: इसमें सूखी औषधीय जड़ी-बूटियों के चूर्ण (पाउडर) को पोटली में भरकर, गर्म करके मालिश की जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य वात-कफ शमन और दर्द निवारण है। पूरी जानकारी के लिए हमारा चूर्ण पिंड स्वेदन पर लेख पढ़ें।
  • पोट्टलि स्वेद: यह एक सामान्य श्रेणी है जिसमें विभिन्न प्रकार की हर्बल पोटलियों — पत्तियाँ, जड़ी-बूटियाँ, या अन्य सामग्री — का उपयोग स्वेदन (फोमेंटेशन) के लिए किया जाता है। विस्तार से जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
  • नवाराकिझि: इसकी विशिष्ट पहचान है — इसमें केवल औषधीय चावल (नवारा/षष्टिक शालि) को दूध और काढ़े में पकाकर पोटली बनाई जाती है। यह अन्य पोटली चिकित्साओं से कहीं अधिक पोषणदायक (बृंहण) है और इसका मुख्य उद्देश्य दर्द निवारण से अधिक शारीरिक पोषण, मांसपेशियों की मज़बूती और तंत्रिका तंत्र का पुनर्वास है।

सरल शब्दों में कहें तो — चूर्ण पिंड स्वेदन मुख्यतः दर्द व अकड़न के लिए है, पोट्टलि स्वेद एक व्यापक श्रेणी है, जबकि नवाराकिझि विशेष रूप से मांसपेशियों की क्षीणता (muscle wasting), न्यूरोलॉजिकल कमज़ोरी और शारीरिक कायाकल्प के लिए बनाई गई एक विशिष्ट, पोषण-प्रधान चिकित्सा है।

नवाराकिझि के लाभ

पारंपरिक ग्रंथों और नैदानिक अनुभव के अनुसार नवाराकिझि चिकित्सा से निम्न लाभ मिल सकते हैं। ध्यान रहे, ये लाभ व्यक्ति-विशेष पर निर्भर करते हैं:

  • मांसपेशियों को गहरा पोषण: कमज़ोर और क्षीण मांसपेशियों को मज़बूती देने में सहायक — विशेष रूप से मांसपेशियों की क्षीणता (muscle wasting) की स्थितियों में।
  • तंत्रिका तंत्र का पुनर्वास: न्यूरोलॉजिकल कमज़ोरी और लकवे के बाद की पुनर्वास प्रक्रिया में सहायक मानी जाती है।
  • शारीरिक बल में वृद्धि: समग्र शारीरिक शक्ति और सहनशक्ति बढ़ाने में सहायक।
  • वज़न व पोषण संतुलन: अत्यधिक दुबलेपन या कुपोषण जैसी स्थितियों में शारीरिक पोषण देने में सहायक।
  • जोड़ों की मज़बूती: जोड़ों के आसपास की मांसपेशियों को सहारा देकर स्थिरता बढ़ाने में सहायक।
  • त्वचा की सेहत: त्वचा को पोषित, मुलायम और चमकदार बनाने में सहायक।
  • सामान्य कायाकल्प: संपूर्ण शारीरिक स्फूर्ति और ऊर्जा बढ़ाने में सहायक।

क्लिनिकल अनुभव बताता है कि नवाराकिझि विशेष रूप से न्यूरोमस्कुलर स्थितियों, लंबी बीमारी के बाद की कमज़ोरी और वृद्धावस्था में शारीरिक पोषण की कमी वाले रोगियों में सहायक सिद्ध होती है।

यह किसके लिए उपयुक्त है

नवाराकिझि चिकित्सा सामान्यतः निम्न स्थितियों में सुझाई जाती है (चिकित्सक की जांच के बाद):

  • मांसपेशियों की क्षीणता (muscle wasting) या दुर्बलता
  • न्यूरोलॉजिकल कमज़ोरी या लकवे के बाद पुनर्वास चरण में
  • लंबी बीमारी के बाद शारीरिक कमज़ोरी
  • अत्यधिक दुबलापन या पोषण की कमी
  • वृद्धावस्था में शारीरिक बल बनाए रखने हेतु
  • खिलाड़ियों व शारीरिक श्रम करने वालों में मांसपेशियों की रिकवरी हेतु
  • सामान्य कायाकल्प व स्वास्थ्य संवर्धन हेतु

यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि हर व्यक्ति के लिए नवाराकिझि उपयुक्त नहीं होती। चिकित्सक आपकी प्रकृति, वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति, पाचन क्षमता और अन्य कारकों की जाँच के बाद ही यह तय करते हैं कि यह चिकित्सा आपके लिए सही है या नहीं।

प्रक्रिया — क्या अपेक्षा करें

Ayujivan Ayurveda & Panchkarma Clinic में नवाराकिझि की प्रक्रिया निम्न चरणों में की जाती है:

1. प्रारंभिक परामर्श और जाँच

चिकित्सक पहले आपकी प्रकृति, वर्तमान शिकायत, पाचन क्षमता और पूर्व चिकित्सा इतिहास की जाँच करते हैं। इसके आधार पर उपयुक्त काढ़ा और दूध का अनुपात तय किया जाता है।

2. नवारा चावल की तैयारी

नवारा या षष्टिक शालि चावल को गाय के दूध और चयनित औषधीय जड़ी-बूटियों के काढ़े में पकाया जाता है, जब तक यह एक नरम, गाढ़ा मिश्रण न बन जाए। इसके बाद इसे मुलायम सूती कपड़े की पोटलियों में बाँधा जाता है।

3. स्नेहन (हल्का तेल मालिश)

पोटली मालिश से पहले शरीर पर हल्का औषधीय तेल लगाया जाता है, ताकि पोटलियाँ आसानी से फिसल सकें और त्वचा सुरक्षित रहे।

4. पोटली मालिश

गुनगुनी नवारा पोटलियों को शरीर के विभिन्न भागों पर एक विशेष लयबद्ध तकनीक से दबाकर, रगड़कर और थपथपाकर मालिश की जाती है। पोटलियों को बीच-बीच में दोबारा गर्म काढ़े-दूध के मिश्रण में डुबोकर तापमान बनाए रखा जाता है। यह प्रक्रिया शरीर के हर अंग पर क्रमवार की जाती है। सत्र सामान्यतः 45 से 60 मिनट तक चलता है।

5. विश्राम काल

प्रक्रिया के बाद रोगी को कुछ समय शांत वातावरण में विश्राम करने दिया जाता है ताकि शरीर पोषक तत्वों को अवशोषित कर सके।

6. स्नान और उपरांत देखभाल

कुछ समय बाद हल्के गुनगुने पानी से स्नान की सलाह दी जाती है। चिकित्सक आहार और दिनचर्या संबंधी सलाह भी देते हैं ताकि चिकित्सा का पूरा लाभ मिल सके।

सामान्यतः नवाराकिझि का पूरा लाभ पाने के लिए इसे लगातार 7 से 14 दिनों तक करने की सलाह दी जाती है, हालांकि गंभीर स्थितियों में चिकित्सक इसे अधिक विस्तारित भी कर सकते हैं।

सावधानियाँ एवं मतभेद

नवाराकिझि एक गहन क्लिनिकल प्रक्रिया है, यह घरेलू उपचार नहीं है और इसे केवल प्रशिक्षित चिकित्सकों की देखरेख में ही करवाना चाहिए। निम्न स्थितियों में विशेष सावधानी आवश्यक है या यह चिकित्सा उपयुक्त नहीं हो सकती:

  • कमज़ोर पाचन शक्ति या अपच की गंभीर स्थिति में (चूँकि यह एक भारी, पोषण-प्रधान चिकित्सा है)
  • गंभीर बुखार या तीव्र संक्रमण के दौरान
  • त्वचा पर खुले घाव या गंभीर संक्रमण की स्थिति में
  • गर्भावस्था के दौरान — केवल चिकित्सक की स्पष्ट अनुमति से
  • अत्यधिक कफ-वृद्धि या मोटापे की स्थिति में विशेष सावधानी
  • दूध से एलर्जी या लैक्टोज़ असहिष्णुता की स्थिति में — चिकित्सक वैकल्पिक काढ़ा सुझा सकते हैं

याद रखें — नवाराकिझि एक पोषण-प्रधान, भारी चिकित्सा है, इसलिए बिना उचित जाँच और पाचन क्षमता के मूल्यांकन के इसे कभी न करवाएँ।

पंचकर्म में नवाराकिझि की भूमिका

नवाराकिझि को आयुर्वेद में एक शक्तिशाली बृंहण (पोषणदायक) स्वेदन चिकित्सा के रूप में देखा जाता है, जो पूर्ण पंचकर्म चिकित्सा के प्रोटोकॉल का एक महत्वपूर्ण भाग बन सकती है। यह अक्सर निम्न तरीकों से उपयोग की जाती है:

  • दीर्घकालिक बीमारी या शल्यक्रिया के बाद शरीर को पुनः पोषण देने हेतु पुनर्वास कार्यक्रम में
  • न्यूरोमस्कुलर पुनर्वास कार्यक्रम के मुख्य घटक के रूप में
  • अन्य स्वेदन चिकित्साओं जैसे चूर्ण पिंड स्वेदन या पोट्टलि स्वेद के साथ चरणबद्ध संयोजन में — जहाँ पहले दर्द निवारण और फिर पोषण पर ध्यान केंद्रित किया जाता है

हमारे क्लिनिक में चिकित्सक आपकी संपूर्ण जाँच के बाद तय करते हैं कि नवाराकिझि को स्वतंत्र चिकित्सा के रूप में देना है या किसी व्यापक पंचकर्म प्रोटोकॉल के भाग के रूप में। यह निर्णय व्यक्तिगत प्रकृति परीक्षण पर आधारित होता है।

नवाराकिझि के दौरान आहार-विहार संबंधी सुझाव

नवाराकिझि एक पोषण-प्रधान चिकित्सा है, इसलिए इसका पूरा लाभ पाने के लिए उचित आहार और दिनचर्या का पालन बहुत महत्वपूर्ण होता है। हमारे चिकित्सक सामान्यतः निम्न सुझाव देते हैं:

  • चिकित्सा के दौरान सुपाच्य, पौष्टिक और हल्का गर्म भोजन लें — ठंडा और अत्यधिक तला भोजन से बचें
  • पर्याप्त प्रोटीन युक्त, सात्विक आहार पर ध्यान दें ताकि चिकित्सा का पोषणदायक प्रभाव बढ़े
  • चिकित्सा अवधि के दौरान अधिक शारीरिक श्रम से बचें, शरीर को पर्याप्त विश्राम दें
  • सत्र के बाद कम से कम 1-2 घंटे आराम करने की सलाह दी जाती है
  • ठंडी हवा, कूलर, AC के सीधे संपर्क से बचें, विशेषकर सत्र के तुरंत बाद
  • नियमित, समयबद्ध दिनचर्या बनाए रखें — यह चिकित्सा के पोषणदायक प्रभाव को बढ़ाने में सहायक होती है
  • शराब, धूम्रपान और अत्यधिक कैफीन से चिकित्सा अवधि के दौरान परहेज़ करें

ये सामान्य दिशा-निर्देश हैं। आपकी प्रकृति, पाचन क्षमता और रोग की अवस्था के अनुसार चिकित्सक आपको विशिष्ट आहार-विहार योजना देंगे।

मिथक बनाम तथ्य

मिथकतथ्य
नवाराकिझि और चूर्ण पिंड स्वेदन एक ही चीज़ हैंदोनों अलग हैं — चूर्ण पिंड स्वेदन में सूखी जड़ी-बूटियों का पाउडर होता है, नवाराकिझि में विशेष औषधीय चावल-दूध का मिश्रण होता है और यह अधिक पोषणदायक है
यह केवल वज़न बढ़ाने के लिए हैयह मांसपेशियों के पुनर्वास, तंत्रिका तंत्र की मज़बूती और सामान्य कायाकल्प के लिए भी उपयोगी मानी जाती है, केवल वज़न बढ़ाने के लिए नहीं
घर पर चावल की पोटली से भी यही लाभ मिल जाता हैनवाराकिझि के लिए विशेष औषधीय चावल, सटीक दूध-काढ़ा अनुपात और प्रशिक्षित तकनीक चाहिए — यह घरेलू उपाय नहीं है
एक ही सत्र से स्थायी लाभ मिल जाता हैलाभ के लिए सामान्यतः 7-14 दिनों के कोर्स की आवश्यकता होती है, और परिणाम व्यक्ति अनुसार भिन्न होते हैं
यह 100% मांसपेशियों की कमज़ोरी ठीक कर देती हैकोई भी चिकित्सा 100% या स्थायी इलाज की गारंटी नहीं दे सकती — यह सहायक पोषणदायक चिकित्सा है
सभी को यह चिकित्सा सूट करती हैकमज़ोर पाचन शक्ति, दूध से एलर्जी जैसी स्थितियों में विशेष सावधानी या चिकित्सक की अनुमति आवश्यक होती है

डॉक्टर से कब मिलें

निम्न स्थितियों में तुरंत किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श करें:

  • मांसपेशियों में लगातार कमज़ोरी या क्षीणता महसूस हो
  • लंबी बीमारी या शल्यक्रिया के बाद शारीरिक पुनर्वास योजना की आवश्यकता हो
  • अत्यधिक दुबलापन या पोषण की कमी की शिकायत हो
  • तंत्रिका तंत्र से जुड़ी कोई समस्या हो और पुनर्वास चाहते हों
  • पहले से कोई पुरानी बीमारी हो और आप यह चिकित्सा लेना चाहते हों
  • यदि आप गर्भवती हैं और यह चिकित्सा लेना चाहती हैं

Ayujivan Ayurveda & Panchkarma Clinic, Jaipur में हमारे अनुभवी चिकित्सक आपकी पूरी जाँच के बाद ही उचित चिकित्सा योजना सुझाते हैं। बिना जाँच के कोई भी चिकित्सा स्वयं शुरू न करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न: नवाराकिझि और चूर्ण पिंड स्वेदन में क्या अंतर है?
उत्तर: चूर्ण पिंड स्वेदन में सूखी जड़ी-बूटियों के पाउडर की पोटली का उपयोग होता है, जो मुख्यतः दर्द निवारण के लिए है। नवाराकिझि में विशेष औषधीय चावल को दूध और काढ़े में पकाकर पोटली बनाई जाती है, जो मुख्यतः पोषण और मांसपेशियों की मज़बूती के लिए है।

प्रश्न: एक सत्र में कितना समय लगता है?
उत्तर: सामान्यतः एक सत्र में लगभग 45 से 60 मिनट लगते हैं, परंतु यह रोगी की स्थिति और चिकित्सक की सलाह पर निर्भर करता है।

प्रश्न: कितने सत्रों की आवश्यकता होती है?
उत्तर: सामान्यतः 7 से 14 दिनों तक लगातार सत्र सुझाए जाते हैं, परंतु यह पूरी तरह से रोग की अवस्था और चिकित्सक के मूल्यांकन पर निर्भर करता है।

प्रश्न: क्या नवाराकिझि से वज़न बढ़ जाता है?
उत्तर: नवाराकिझि पोषण देने में सहायक मानी जाती है, जिससे कुछ रोगियों में स्वस्थ वज़न बढ़ोतरी हो सकती है, परंतु यह किसी भी स्थिति में गारंटीशुदा परिणाम नहीं है। प्रभाव व्यक्ति की प्रकृति, पाचन क्षमता और चयापचय पर निर्भर करता है।

प्रश्न: क्या यह चिकित्सा दर्दरहित होती है?
उत्तर: हाँ, नवाराकिझि एक सुखदायक और आरामदायक प्रक्रिया है। अधिकांश रोगी इसे बहुत सुकूनदायक अनुभव बताते हैं।

प्रश्न: क्या मधुमेह के रोगी यह चिकित्सा करा सकते हैं?
उत्तर: मधुमेह या अन्य चयापचय संबंधी स्थितियों में यह चिकित्सा केवल चिकित्सक की स्पष्ट अनुमति और निगरानी में ही करानी चाहिए, क्योंकि इसमें चावल और दूध का उपयोग होता है। बिना जाँच के इसे न करें।

प्रश्न: क्या इसे घर पर स्वयं किया जा सकता है?
उत्तर: नहीं। नवाराकिझि के लिए विशेष औषधीय चावल, सटीक दूध-काढ़ा अनुपात, सही तापमान नियंत्रण और प्रशिक्षित तकनीक चाहिए। यह क्लिनिक में प्रशिक्षित चिकित्सक की देखरेख में ही करवाई जानी चाहिए।

प्रश्न: क्या नवाराकिझि के कोई दुष्प्रभाव हैं?
उत्तर: सही तरीके से और योग्य चिकित्सक की देखरेख में की जाने पर यह सामान्यतः सुरक्षित मानी जाती है, परंतु किसी भी चिकित्सा की तरह व्यक्ति विशेष पर प्रतिक्रिया भिन्न हो सकती है। इसलिए हमेशा प्रशिक्षित केंद्र में ही यह चिकित्सा करवाएँ।

प्रश्न: नवाराकिझि किन लोगों के लिए सबसे अधिक उपयुक्त मानी जाती है?
उत्तर: यह विशेष रूप से मांसपेशियों की क्षीणता, न्यूरोलॉजिकल कमज़ोरी, लंबी बीमारी के बाद की दुर्बलता और सामान्य कायाकल्प चाहने वाले लोगों के लिए उपयुक्त मानी जाती है, परंतु अंतिम निर्णय चिकित्सक की जाँच के बाद ही लिया जाना चाहिए।

निष्कर्ष एवं CTA

नवाराकिझि आयुर्वेद की सबसे पोषणदायक, गहन और पारंपरिक बृंहण-स्वेदन चिकित्साओं में से एक है, जो मांसपेशियों को मज़बूती देने, तंत्रिका तंत्र के पुनर्वास में सहायता करने और सामान्य शारीरिक कायाकल्प में मदद कर सकती है। हालांकि, इसकी विशिष्ट प्रकृति के कारण इसे केवल योग्य, प्रशिक्षित चिकित्सकों की देखरेख में ही करवाना चाहिए।

यदि आप जयपुर में नवाराकिझि चिकित्सा करवाना चाहते हैं, तो Ayujivan Ayurveda & Panchkarma Clinic में हमारे अनुभवी चिकित्सकों से मिलें। हम आपकी प्रकृति और स्वास्थ्य स्थिति की पूरी जाँच के बाद ही उचित चिकित्सा योजना सुझाते हैं।

अधिक जानकारी के लिए हमारे बारे में यहाँ पढ़ें या किसी भी प्रश्न के लिए हमसे संपर्क करें। पंचकर्म चिकित्सा के समग्र लाभों के बारे में जानने के लिए हमारा पंचकर्म के फायदे लेख भी अवश्य पढ़ें।

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समापन अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्य के लिए है और यह किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। किसी भी आयुर्वेदिक चिकित्सा को अपनाने से पहले हमेशा एक योग्य, पंजीकृत आयुर्वेदिक चिकित्सक से व्यक्तिगत परामर्श लें। परिणाम हर व्यक्ति में भिन्न हो सकते हैं और किसी भी चिकित्सा से 100% या स्थायी इलाज की गारंटी नहीं दी जा सकती।

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